
भारत की जनसंख्या बढ़ रही है, लेकिन प्रजनन दर (Fertility Rate) पिछले कुछ वर्षों में घट रही है, विशेषकर शहरी और निम्न-उपजाऊ इलाकों में। यह बदलाव सिर्फ आकड़ों का प्रश्न नहीं है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय कारणों का परिणाम है। इस लेख में हम उन प्रमुख कारणों का विश्लेषण करेंगे जिनके कारण भारतीय महिलाओं की प्रजनन दर में कमी आई है।
1. शिक्षा और करियर की प्राथमिकता
आज की भारतीय महिलाएं पहले की तुलना में अधिक शिक्षित और आत्मनिर्भर हैं। उच्च शिक्षा और करियर पर ध्यान देने के कारण विवाह और बच्चों की योजना में देरी होती है। 20–30 वर्ष की ऊर्जावान प्रजनन आयु का कुछ हिस्सा खो जाता है। बच्चे पैदा करने की उम्र बढ़ने से प्राकृतिक प्रजनन क्षमता कम होती है। उदाहरण के तौर पर उच्च शिक्षा पाने वाली महिलाएं पहले नौकरी या पेशेवर लक्ष्य को प्राथमिकता देती हैं, जिससे गर्भधारण की उम्र बढ़ती है।
2. जीवनशैली और तनाव
आधुनिक जीवनशैली में तनाव, अव्यवस्थित खान-पान और नींद की कमी से हार्मोनल असंतुलन होता है। धूम्रपान, शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थ के सेवन की आदतें शुक्राणुओं की गुणवत्ता, ओव्यूलेशन और गर्भधारण—तीनों पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्जन) में समस्या हो सकती है। तनाव से प्रजनन स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
कैंसर उपचार की पहली मजबूत कड़ी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी
3. देर से विवाह और संतान योजना में बदलाव
शहरीकरण और सामाजिक मान्यताओं में बदलाव के चलते महिलाएं 30 वर्ष के बाद शादी कर रही हैं। परिणामस्वरूप बच्चे की योजना भी देर से होती है। प्राकृतिक तौर पर उम्र के साथ प्रजनन क्षमता घटती है। 35 की उम्र के बाद महिला के अंडों की संख्या और गुणवत्ता दोनों में गिरावट आती है, जिससे गर्भधारण की संभावना कम होती है और गर्भपात या जटिलताओं का खतरा बढ़ता है।
4. स्वास्थ्य समस्याएं और प्रजनन रोग
कई स्वास्थ्य स्थितियां प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती हैं जिसमें PCOS / PCOD (हार्मोनल विकार), थायरॉइड असंतुलन, यूटेरिन समस्याएं (जैसे एंडोमेट्रियोसिस), अप्राकृतिक जीवनशैली से संबद्ध रोग शामिल हैं। इन स्थितियों के कारण महिला का ओव्यूलेशन प्रभावित होता है और गर्भधारण कठिन हो जाता है।
महिला और स्त्री रोगों के इलाज में रोबोटिक सर्जरी एक कारगर तकनीक
5. पर्यावरणीय प्रभाव
आज के समय में पर्यावरणीय कारकों का प्रजनन स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव देखा गया है, प्रदूषण और रसायनों का एक्सपोजर प्लास्टिक और औद्योगिक रसायन, ये कारक हार्मोनल असंतुलन और शुक्राणु/अंडों की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
6. सामाजिक मान्यताएं और शहरी-ग्रामीण अंतर
शहरी क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अच्छी है, लेकिन परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता अधिक है। परिवार का आकार छोटा होना सामान्य माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में भी बदलती जीवनशैली प्रजनन विकल्पों को प्रभावित कर रही है।
क्या है एक्जिमा? जानें कारण, लक्षण और बचाव के उपाय
7. चिकित्सा प्रगति और विकल्प
आज कई दंपत्तियां आर्टिफिशियल रिप्रोडक्शन तकनीकों (जैसे IVF) का सहारा लेती हैं, लेकिन ये महंगी होती हैं। हर किसी के लिए उपलब्ध नहीं होतीं। कई बार सफलता की दर भी उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।
संभावित समाधान और सुझाव
समय पर स्वास्थ्य जांच: 20–30 की उम्र में प्रजनन स्वास्थ्य की जांच आवश्यक है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: संतुलित आहार, योग-ध्यान, नींद पर ध्यान, धूम्रपान, शराब, मादक पदार्थों के सेवन से बचें।
मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल: तनाव प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
सामाजिक समर्थन: परिवार और समाज का सकारात्मक रवैया।
सरकारी कार्यक्रम: जागरूकता अभियानों के जरिये प्रजनन शिक्षा।
किडनी की सेहत बिगाड़ रही खराब लाइफस्टाइल
निसंतानता के लिए कई आधुनिक उपचार तकनीकें
आईवीएफ (In Vitro Fertilization)
अंडाणु और शुक्राणु को लैब में मिलाकर भ्रूण बनाया जाता है, फिर गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।
आईयूआई (Intrauterine Insemination)
धुले हुए स्वस्थ शुक्राणुओं को सीधे गर्भाशय में डाला जाता है, ताकि गर्भधारण की संभावना बढ़े।
ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection)
एक ही शुक्राणु को माइक्रोस्कोप की मदद से सीधे अंडाणु में इंजेक्ट किया जाता है—पुरुष नपुंसकता में उपयोगी।
दिल और दिमाग के लिए है बेहद जरूरी विटामिन B-12, जानें इसकी कमी के लक्षण, बीमारियां और उपचार
एग/स्पर्म डोनेशन
डोनर के अंडाणु या शुक्राणु का उपयोग कर गर्भधारण की प्रक्रिया कराई जाती है।
एम्ब्रियो फ्रीजिंग
बने हुए भ्रूण को फ्रीज कर भविष्य में गर्भधारण के लिए सुरक्षित रखा जाता है।
सरोगेसी (Surrogacy)
किसी अन्य महिला के गर्भ में भ्रूण प्रत्यारोपित कर उससे बच्चे को जन्म दिलाया जाता है।
: डॉ. एम एल स्वर्णकार
स्त्री रोग एवं निसंतानता विशेषज्ञ,
(संस्थापक एवं एमेरिटस चेयरमैन, महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी)