
आज के दौर में डायबिटीज़ (मधुमेह) केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि एक तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। पहले के समय में शास्त्रों में भी उल्लेख मिलता है कि यह रोग उन लोगों में अधिक होता है जो आरामतलब जीवन जीते हैं, शारीरिक गतिविधि कम करते हैं और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहते हैं।
लेकिन वर्तमान समय की स्थिति इससे कहीं अधिक जटिल हो चुकी है। अब सिर्फ़ आलस्य या कम शारीरिक गतिविधि ही नहीं, बल्कि तनाव (Stress) भी डायबिटीज़ का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का दबाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक तनाव—ये सभी मिलकर शरीर के मेटाबॉलिज़्म को प्रभावित करते हैं और धीरे-धीरे व्यक्ति को मधुमेह की ओर ले जाते हैं।
पहले डायबिटीज़ को उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा बदल चुकी है। आजकल बच्चों में भी मधुमेह के मामले सामने आ रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हैं—
यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और संकेत देती है कि आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
डायबिटीज़ से जूझ रहे अधिकांश लोगों के मन में एक सामान्य सवाल होता है—
“जब हमारी शुगर कभी-कभी ठीक रहती है, तो HbA1c 7 से नीचे क्यों नहीं आता?”
दरअसल, HbA1c डायबिटीज़ कंट्रोल का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है।
HbA1c क्या है?
यह पिछले 2–3 महीनों की औसत ब्लड शुगर को दर्शाता है। जब खून में शुगर बढ़ती है, तो उसका कुछ हिस्सा हीमोग्लोबिन से जुड़ जाता है, जिसे ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन (HbA1c) कहा जाता है।
World Health Organization की गाइडलाइन्स के अनुसार:
इसलिए हर डायबिटीज़ मरीज का लक्ष्य होना चाहिए कि HbA1c को 7 से नीचे लाया जाए।
बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि अगर उनकी फास्टिंग शुगर (सुबह की शुगर) ठीक है, तो सब कुछ कंट्रोल में है।
लेकिन यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। HbA1c को कंट्रोल में रखने के लिए ज़रूरी है कि दिनभर अलग-अलग समय पर शुगर संतुलित रहे:
अधिकतर लोग महीने में एक या दो बार शुगर चेक करवाते हैं, जो पर्याप्त नहीं है।
अगर आप HbA1c कम करना चाहते हैं, तो:
इससे यह समझने में मदद मिलती है कि शुगर किस समय सबसे ज्यादा बढ़ रही है।
HbA1c कंट्रोल करने के लिए केवल दवा लेना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए तीनों चीज़ों का संतुलन जरूरी है:
भारतीय खानपान में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है—रोटी, चावल, आलू आदि।
संतुलित डाइट का उदाहरण:
छोटे-छोटे हिस्सों में खाने से शुगर धीरे-धीरे बढ़ती है और कंट्रोल में रहती है।
यह शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है और शुगर कंट्रोल में मदद करता है।
आज के समय में तनाव (Stress) डायबिटीज़ का एक बड़ा ट्रिगर बन चुका है। लगातार तनाव में रहने से हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ सकती है।
इसलिए मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है जितना डाइट और दवा पर।
डायबिटीज़ एक लाइफस्टाइल बीमारी है, लेकिन सही जानकारी और अनुशासन के साथ इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
इन सभी को अपनाकर HbA1c को 7 से नीचे लाना पूरी तरह संभव है।
यह एक दिन का काम नहीं है, लेकिन निरंतर प्रयास से बेहतर परिणाम जरूर मिलते हैं। आवश्यकता होने पर आयुर्वेद या अन्य चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञ से भी परामर्श लिया जा सकता है।
डॉ. इंदु बाला
आयुर्वेद चिकित्सक, अजमेर (राजस्थान)