
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी को कैंसर के इलाज में रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी कैंसर के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण और पुरानी विधाओं में से एक है, जिसकी भूमिका आज भी केंद्रीय बनी हुई है। यह विभाग विशेष रूप से कैंसर का शारीरिक रूप से उपचार करने पर केंद्रित है। जहां सर्जरी के माध्यम से कैंसरग्रस्त ट्यूमर या प्रभावित ऊतकों को शरीर से निकालने का प्रयास किया जाता है। कई मामलों में यह इलाज की पहली और मुख्य कड़ी होती है, खासकर जब ट्यूमर सीमित क्षेत्र में हो और शरीर के अन्य भागों में न फैला हो।
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी का निर्णय कई आधारों पर लिया जाता है, जैसे—कैंसर का प्रकार, उसका स्टेज, आकार, स्थान, रोगी की उम्र और संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति। इसके साथ ही बायोप्सी, इमेजिंग और जेनेटिक जांच जैसी डायग्नोस्टिक तकनीकों की मदद से यह तय किया जाता है कि सर्जरी कब और कैसे की जाएगी।
आज आधुनिक तकनीक, जैसे लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी ने उपचार को और सुरक्षित, सटीक और कम दर्दनाक बना दिया है। कई मामलों में सर्जरी के साथ रेडिएशन, कीमोथैरेपी या टारगेटेड थेरेपी भी दी जाती है, जिससे बेहतर परिणाम मिलते हैं। इस प्रकार सर्जिकल ऑन्कोलॉजी न केवल कैंसर को नियंत्रित करने में मदद करती है, बल्कि मरीज के जीवन की गुणवत्ता और जीवित रहने की संभावनाओं को भी बढ़ाती है। कुल मिलाकर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी कैंसर के इलाज के लिए एक फाउंडेशन स्टोन है, जो निदान से लेकर पूर्ण उपचार और पैलिएशन तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
महत्वपूर्ण भूमिका
निदान (Diagnosis): सर्जन बायोप्सी (Biopsy) करके कैंसर की पुष्टि के लिए ट्यूमर का नमूना लेते हैं।
स्टेजिंग (Staging): सर्जरी के दौरान, सर्जन यह निर्धारित करते हैं कि कैंसर कितना फैल चुका है (जैसे कि आस-पास के लिम्फ नोड्स में), जो आगे के उपचार की योजना (कीमोथेरेपी या रेडिएशन) के लिए महत्वपूर्ण है।
प्राथमिक उपचार (Primary Treatment): कई ठोस ट्यूमरों (Solid Tumors) के लिए, कैंसर को जड़ से खत्म करने का सबसे पहला और सबसे अच्छा तरीका सर्जिकल रिसेक्शन (Surgical Resection) ही होता है।
निवारण (Prevention): कुछ उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों में कैंसर होने से पहले ही जोखिम वाले अंगों को हटा दिया जाता है। जैसे निवारक मास्टेक्टॉमी।
पैलिएशन (Palliation): यदि कैंसर असाध्य है, तो सर्जरी का उपयोग दर्द कम करने, रुकावटें दूर करने या रोगी के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए किया जाता है।
उपचार का आधार
स्थानीय नियंत्रण: सर्जरी का मुख्य आधार यह सुनिश्चित करना है कि ट्यूमर को उसके आस-पास के स्वस्थ ऊतकों की एक स्पष्ट मार्जिन (Clear Margin) के साथ पूरी तरह से हटा दिया जाए ताकि कैंसर कोशिकाओं के पीछे छूटने की संभावना कम हो।
शल्य चिकित्सा की सीमाएं: सर्जन का लक्ष्य ट्यूमर को इस तरह हटाना होता है कि पैथोलॉजिस्ट द्वारा जांच करने पर हटे हुए ऊतक के किनारों पर कोई कैंसर कोशिकाएं न मिलें।
न्यूनतम इनवेसिव तकनीकें: आजकल, लेप्रोस्कोपी और रोबोटिक सर्जरी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ये तकनीकें छोटे चीरे, तेजी से रिकवरी और कम दर्द सुनिश्चित करती हैं।
बहुविषयक दृष्टिकोण: सर्जन अक्सर ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि रोगी को सर्जरी से पहले या बाद में अन्य उपचारों का सर्वोत्तम संयोजन मिल सके।
: डॉ. राज गोविंद शर्मा,
सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट,
महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर