कंगारू मदर केयर: नन्हे शिशुओं के लिए एक ‘जादुई’ स्पर्श

अक्सर कहा जाता है कि मां की गोद दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह होती है। चिकित्सा विज्ञान ने इस बात को ‘कंगारू मदर केयर’ (KMC) के माध्यम से प्रमाणित भी किया है। विशेष रूप से समय से पहले जन्मे (Premature) और कम वजन वाले शिशुओं के लिए यह तकनीक किसी जीवनदान से कम नहीं है। कंगारू मदर केयर आधुनिक चिकित्सा और ममता का एक अद्भुत संगम है। यह कम लागत वाली, प्रभावी और प्राकृतिक विधि है जो नन्हे शिशुओं को एक मजबूत शुरुआत देने की शक्ति रखती है। यदि आपके आसपास कोई नवजात शिशु है जिसे अतिरिक्त देखभाल की जरूरत है, तो KMC के बारे में जरूर बात करें।

क्या है कंगारू मदर केयर?
कंगारू मदर केयर देखभाल की एक ऐसी तकनीक है जिसमें शिशु को मां (या परिवार के किसी अन्य सदस्य) की छाती पर सीधे त्वचा से त्वचा के संपर्क (Skin-to-Skin Contact) में रखा जाता है। जिस तरह एक कंगारू अपने बच्चे को अपने शरीर से लगी थैली में सुरक्षित और गर्म रखता है, ठीक उसी तरह इस पद्धति में शिशु को गर्माहट दी जाती है।

इसके तीन मुख्य स्तंभ हैं:

निरंतर त्वचा से त्वचा का संपर्क: बच्चे को केवल डायपर और टोपी पहनाकर मां की नग्न छाती पर रखा जाता है।

अनन्य स्तनपान: यह तकनीक बच्चे को मां का दूध पीने के लिए प्रोत्साहित करती है।

जल्द डिस्चार्ज और फॉलो-अप: इससे अस्पताल में रहने की अवधि कम हो जाती है।

बच्चों के स्वास्थ्य के लिए इसके फायदे
KMC केवल एक भावनात्मक जुड़ाव नहीं है, बल्कि इसके कई शारीरिक और मानसिक लाभ हैं:
शरीर के तापमान का नियंत्रण: नवजात शिशु, विशेषकर प्री-मैच्योर बच्चे, अपने शरीर का तापमान बनाए रखने में सक्षम नहीं होते। मां के शरीर की गर्मी बच्चे को ‘हाइपोथर्मिया’ (शरीर का ठंडा पड़ना) से बचाती है।
संक्रमण से सुरक्षा: अध्ययनों से पता चला है कि KMC प्राप्त करने वाले शिशुओं में अस्पताल में होने वाले संक्रमण (Sepsis) का खतरा काफी कम हो जाता है।
हृदय गति और श्वसन में सुधार: मां की धड़कन और सांसों की लय बच्चे की हृदय गति और सांस लेने की प्रक्रिया को स्थिर करने में मदद करती है।
वजन में तेजी से वृद्धि: जब बच्चा गर्म और तनावमुक्त रहता है, तो उसकी ऊर्जा शरीर के तापमान को बनाए रखने के बजाय विकास और वजन बढ़ने में खर्च होती है।
बेहतर नींद और कम तनाव: त्वचा के संपर्क से ‘ऑक्सीटोसिन’ हार्मोन रिलीज होता है, जिससे बच्चा कम रोता है और गहरी नींद सोता है।
मस्तिष्क का विकास: शांत वातावरण और सुरक्षा का अहसास शिशु के न्यूरोलॉजिकल विकास के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

मां के लिए लाभ
यह मां में दूध के उत्पादन को बढ़ाता है।
यह मां में प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression) और चिंता को कम करता है।
मां और बच्चे के बीच एक अटूट भावनात्मक बंधन विकसित होता है।

कुछ जरूरी बातें
कौन दे सकता है KMC? हालांकि मां सबसे उपयुक्त है, लेकिन मां की अनुपस्थिति या थकान की स्थिति में पिता, दादी या परिवार का कोई भी स्वस्थ सदस्य KMC दे सकता है।

कितनी देर तक? इसे दिन में कम से कम 1 घंटे के सत्र में देना चाहिए। जितना अधिक समय (24 घंटे भी संभव है), उतना ही बेहतर परिणाम मिलता है।

सावधानी भी जरूरी:
साफ-सफाई: KMC देने वाले व्यक्ति के हाथ और कपड़े पूरी तरह साफ होने चाहिए। संक्रमण से बचने के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है।

सही स्थिति (Position): बच्चे का सिर एक तरफ मुड़ा हो और सांस की नली खुली रहे। बच्चे के पैर ‘मेंढक की मुद्रा’ (Frog position) में होने चाहिए।

बीमारी में बचाव: यदि मां या परिवार के सदस्य को सर्दी, खांसी या बुखार है, तो उन्हें KMC नहीं देनी चाहिए।

गहने और परफ्यूम: शरीर पर कोई नुकीला गहना न पहनें जिससे बच्चे को चोट लगे। साथ ही, तेज गंध वाले परफ्यूम या पाउडर का इस्तेमाल न करें।

निगरानी: ध्यान रखें कि बच्चे का चेहरा ढका न हो और वह आसानी से सांस ले रहा हो। यदि बच्चा नीला या पीला पड़े, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

नशे से परहेज: KMC देने वाले व्यक्ति को धूम्रपान या शराब का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

India Health TV

subscribe now