जन्मजात मूत्रमार्ग की समस्या हाइपोस्पेडिया: कब जरूरी है सर्जरी और कैसे मिलता है समाधान

Hypospadias

जन्म के बाद कुछ बच्चों में ऐसी शारीरिक स्थितियां देखी जाती हैं, जिन पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। ऐसी ही एक जन्मजात स्थिति है— Hypospadias (हाइपोस्पेडिया)। सही जानकारी और समय पर उपचार से इस समस्या का सफल समाधान संभव है।
हाइपोस्पेडिया लड़कों में होने वाली एक जन्मजात (Congenital) स्थिति है, जिसमें मूत्रमार्ग (Urinary opening) का छिद्र लिंग के सिरे पर न होकर नीचे की ओर किसी भी स्थान पर हो सकता है। यह समस्या हल्की से लेकर गंभीर तक हो सकती है। कुछ मामलों में लिंग का हल्का टेढ़ापन (Chordee) भी देखने को मिलता है।

मुख्य लक्षण
मूत्र का छिद्र सामान्य स्थान पर न होना
पेशाब करते समय मूत्रधारा का नीचे या साइड में जाना
लिंग का नीचे की ओर मुड़ा होना
फोरस्किन (ऊपरी त्वचा) का अधूरा विकसित होना
बड़े होने पर पेशाब करने या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं

हाइपोस्पेडिया क्यों होता है?
इसका सटीक कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होता, लेकिन कुछ संभावित कारण हैं।

  • गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल असंतुलन
  • आनुवंशिक (Genetic) कारण
  • गर्भ में विकास के दौरान मूत्रमार्ग का पूरा न बन पाना

इसका इलाज कैसे संभव है?
हाइपोस्पेडिया का सबसे प्रभावी उपचार सर्जरी (Hypospadias Repair) है। आमतौर पर यह सर्जरी बच्चे के 6 से 18 महीने की उम्र के बीच करना बेहतर माना जाता है। ऑपरेशन का उद्देश्य मूत्रमार्ग को सही स्थान तक लाना, लिंग के टेढ़ेपन को ठीक करना है। ताकि सामान्य पेशाब हो और भविष्य में सामान्य यौन कार्य सुनिश्चित हो सके। अधिकांश मामलों में सर्जरी सफल रहती है और बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है।
माता-पिता ध्यान रखें कि जन्म के बाद बच्चे की बाल रोग विशेषज्ञ, पीडियाट्रिक सर्जन या यूरोलॉजिस्ट से जांच जरूर कराएं। बिना डॉक्टर की सलाह के खतना (Circumcision) न करवाएं। समय पर उपचार से जटिलताओं से बचाव संभव है। सही जानकारी, जागरूकता और समय पर इलाज से हाइपोस्पेडिया जैसी स्थिति भी आसानी से मैनेज की जा सकती है।

: डॉ. अरविंद शुक्ला
सीनियर पीडियाट्रिक सर्जन, महात्मा गांधी अस्पताल

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