
रजोनिवृति जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह महिला जीवन का स्वाभाविक चरण है, जब मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है। आमतौर पर यह अवस्था 45 से 55 वर्ष की आयु के बीच आती है। इस समय शरीर में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, विशेषकर एस्ट्रोजन के स्तर में कमी, जिसके कारण शारीरिक और मानसिक बदलाव अनुभव होते हैं। सही जानकारी, संतुलित जीवनशैली और उचित देखभाल अपनाकर इस चरण को सहज और स्वस्थ बनाया जा सकता है।
लगातार 12 महीनों तक मासिक धर्म न होने पर महिला रजोनिवृति अवस्था में मानी जाती है। यह अंडाशय की कार्यक्षमता में कमी और प्रजनन क्षमता के प्राकृतिक समापन का संकेत है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की जैविक प्रक्रिया है।
मुख्य लक्षण
* अचानक गर्मी का एहसास और अत्यधिक पसीना आना
* नींद न आना या बार-बार नींद टूटना
* मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और बेचैनी
* मासिक धर्म का अनियमित होकर बंद होना
* हड्डियों की कमजोरी
* त्वचा का रूखापन और बालों का झड़ना
* हृदय रोगों का बढ़ता जोखिम
क्या करें ?
आयुर्वेदिक के अनुसार ये एक उम्र के साथ—साथ सामान्य प्रक्रिया है। विशेषकर वात और पित्त दोष की वृद्धि से। इस समय शरीर की अग्नि (पाचन शक्ति) और धातुओं के पोषण में कमी आ सकती है। इसलिए संतुलित आहार-विहार और औषधियों का विशेष महत्व होता है।
संतुलित आहार लें
दूध, दही, हरी सब्जियां, तिल, मेवे और दालें कैल्शियम व पोषण प्रदान करती हैं। मौसमी फल शरीर को आवश्यक विटामिन और मिनरल देते हैं। हल्का, सुपाच्य भोजन पाचन को बेहतर बनाता है। अत्यधिक चाय, कॉफी और जंक फूड का सेवन न करें।
सहायक औषधियां
आयुर्वेद में हार्मोन को संतुलित करने वाली कुछ सहायक औषधियां भी हैं। जैस शतावरी शरीर को शीतलता व ऊर्जा प्रदान करती है। अश्वगंधा, तनाव कम करने और नींद सुधारने में उपयोगी है। गुडूची और शहद, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। वहीं त्रिफला पाचन सुधारकर शरीर को शुद्ध रखने में मदद करने में सहायक है।
जीवनशैली
इस स्थिति में योग और प्राणायाम करें। यह मानसिक शांति देते हैं। सूर्य नमस्कार और नियमित व्यायाम से हड्डियां मजबूत होती हैं।
ध्यान, संगीत और पसंदीदा गतिविधियां तनाव कम करने में सहायक हैं। पर्याप्त धूप से विटामिन D मिलता है। सकारात्मक सोचें।
देर रात तक जागने की आदत छोड़ें। तनावपूर्ण और असंतुलित दिनचर्या से बचें। धूम्रपान और मदिरापान से बचें।
रजोनिवृति एक स्वाभाविक परिवर्तन है, मानसिक सोच और योग को साथ लेकर इसे सकारात्मक बनाया जा सकता है। रजोनिवृति के समय महिलाएं बहुत दुखद दौर से गुजरती हैं कभी पसीना आता है, कभी खुद खामोश सी हो जाती हैं। कई बार ग्रामीण महिलाएं इसको सही से समझ नहीं पाती हैं, जो कि कई बार उनके लिए बड़े ही परेशानी के दिन होते हैं।
आयुर्वेदिक जीवनशैली महिलाओं को इस समय शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह जीवन का ठहराव नहीं, बल्कि स्वयं की देखभाल और संतुलन सीखने का अवसर है। हालांकि आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन एक अच्छे आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से ही करें।
: डॉ. इंदु बाला,
वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक